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प्याज के भाव 4 हजार के पार स्टॉक खत्म होने से किसानों को सीमित लाभ

लासलगांव। करीब दो साल तक चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के स्तर से नीचे रहने के बाद प्याज की कीमतों में एक बार फिर तेजी दिखाई दे रही है। नासिक जिले की लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति में गर्मी की फसल वाले प्याज का भाव 4,351 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। उपलब्ध बाजार रिकॉर्ड में 12 सितंबर को यह दर दिखाई गई है। इसे पूरे सितंबर का औसत भाव बताने से पहले आधिकारिक मासिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।
प्याज के भाव चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंचने से बाजार में हलचल बढ़ी है। लंबे समय तक कम कीमत मिलने से परेशान उत्पादकों को इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसके बावजूद ज्यादातर किसानों के सामने एक अलग समस्या खड़ी हो गई है। कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है, जब किसानों के पास भंडारित प्याज का बड़ा हिस्सा बिक चुका है और बचा हुआ स्टॉक भी लगभग खत्म होने की स्थिति में है।
गर्मी के मौसम में तैयार होने वाले प्याज को किसान कुछ महीनों तक भंडारण कर सकते हैं। इसी भंडारित उपज को जरूरत के अनुसार बाजार में बिक्री के लिए लाया जाता है। सीजन की शुरुआत में बाजार भाव कम रहने से कई किसानों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा। उपज खराब होने की आशंका, भंडारण खर्च और तत्काल पैसों की जरूरत के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने अपना प्याज कम कीमत पर ही बेच दिया।
जब बाजार में प्याज की कीमतें बढ़नी शुरू हुईं, तब तक किसानों की उपज का बड़ा हिस्सा मंडियों में पहुंच चुका था। ऐसे में कीमतों की मौजूदा तेजी का पूरा फायदा सभी उत्पादकों को मिलने की संभावना कम है। जिन किसानों के पास अभी भी अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज बचा हुआ है, उन्हें बढ़े हुए भाव से लाभ मिल सकता है। वहीं पहले उपज बेच चुके किसानों को इस तेजी से प्रत्यक्ष फायदा नहीं होगा।
प्याज की खेती करने वाले किसानों के लिए केवल ऊंचा बाजार भाव पर्याप्त नहीं होता। यह भी महत्वपूर्ण है कि कीमतें किस समय बढ़ी हैं और उस समय उनके पास बिक्री के लिए कितना माल मौजूद है। यदि भाव तब बढ़ते हैं, जब किसानों का स्टॉक समाप्त होने वाला हो, तो बाजार में दिखाई देने वाली तेजी उनकी वास्तविक आमदनी में बहुत बड़ा बदलाव नहीं ला पाती।
सीजन के शुरुआती महीनों में कम भाव मिलने से किसान लगातार दबाव में रहे। प्याज को लंबे समय तक संभालकर रखने के लिए उचित भंडारण व्यवस्था चाहिए। भंडारण के दौरान नमी, गर्मी और दूसरी परिस्थितियों के कारण प्याज खराब होने का खतरा बना रहता है। किसानों को यह तय करना पड़ता है कि वे बेहतर भाव की प्रतीक्षा करें या नुकसान से बचने के लिए मौजूदा कीमत पर उपज बेच दें।
कई किसानों ने खराब होने के खतरे को देखते हुए पहले ही अपना प्याज बाजार में पहुंचा दिया था। उस समय कीमतें अपेक्षाकृत कम थीं। अब जब भाव 4,351 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा है, तब बाजार में किसानों के पास उपलब्ध प्याज की मात्रा सीमित बताई जा रही है। इससे कीमत बढ़ने के बावजूद इसका लाभ चुनिंदा उत्पादकों तक ही पहुंचने की स्थिति बन सकती है।
लासलगांव को प्याज के प्रमुख थोक बाजारों में गिना जाता है। यहां के भाव का असर आसपास के उत्पादन क्षेत्रों और अन्य बाजारों पर भी देखा जाता है। मंडी में कीमत बढ़ने की खबर किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। फिर भी किसी एक दिन के भाव को पूरे महीने की स्थायी स्थिति नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्याज की कीमतें आवक, गुणवत्ता और मांग के अनुसार बदलती रहती हैं।
बाजार में प्याज की कम आवक होने पर कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं आवक बढ़ने पर भाव में गिरावट की स्थिति बन सकती है। अलग-अलग गुणवत्ता के प्याज को भी अलग कीमत मिलती है। इसलिए 4,351 रुपये प्रति क्विंटल के आंकड़े से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि प्रत्येक किसान के प्याज की बिक्री इसी दर पर हुई है।
किसानों की वास्तविक कमाई की गणना करते समय उत्पादन लागत, भंडारण पर आया खर्च, परिवहन, उपज में हुई खराबी और बिक्री के समय मिले भाव को देखना आवश्यक है। जिन किसानों ने कम दाम पर बड़ी मात्रा में प्याज बेच दिया, उनके लिए मौजूदा तेजी देर से आई राहत जैसी है। जिनके पास अभी स्टॉक बचा है, वे बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद कर सकते हैं।
फिलहाल लासलगांव बाजार में प्याज का भाव चार हजार रुपये प्रति क्विंटल के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर पहुंचना उत्पादकों के लिए सकारात्मक संकेत है। इसके बावजूद किसानों को कितना वास्तविक लाभ होगा, यह उनके पास बचे स्टॉक और प्याज की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। बाजार की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि कीमतों में वृद्धि का लाभ उस समय किसानों तक कितना पहुंचता है, जब उनकी अधिकांश उपज पहले ही कम दाम पर बिक चुकी होती है।





